चंदेरी मध्य प्रदेश का ऐतिहासिक किला और प्राचीन द्वार – इतिहास, रहस्य और खूबसूरती से भरा अनोखा गाँव

🌟 “चंदेरी: इतिहास, रहस्य और शताब्दियों की धड़कनों से भरा मध्य प्रदेश का अनोखा शहर”

मध्य प्रदेश के अशोकनगर ज़िले में बसा चंदेरी एक ऐसा शहर है, जो हर मोड़ पर इतिहास की खुशबू, रहस्यों की परछाई और पुरानी दुनिया की सुंदरता समेटे बैठा है। यह वही जगह है, जहाँ हर पत्थर, हर दीवार और हर गली आपको किसी न किसी कहानी का हिस्सा बना देती है।
यही कारण है कि Stree 2 जैसी फिल्मों ने भी इस शहर को अपना मुख्य शूटिंग लोकेशन चुना—क्योंकि चंदेरी सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि एक जिंदगी से भरपूर माहौल है।

🏰 चंदेरी का इतिहास — 1000 साल पुराना सुनहरा अध्याय

चंदेरी का इतिहास 11वीं सदी से भी पहले का है। यह शहर कभी विजयनगर, दिल्ली सल्तनत, मुगल साम्राज्य, और बाद में सिंधिया राजवंश के अधीन रहा।
इतने राजवंशों का प्रभाव आज भी यहाँ की इमारतों, हवेलियों, मस्जिदों और स्मारकों में साफ दिखाई देता है।

  • चंदेरी किला – पहाड़ी पर बना यह विशाल किला पूरे शहर पर नज़र रखता है।
  • काटी घाटी दरवाज़ा – एक ही चट्टान को काटकर बनाया गया ये गेट 1480 में तैयार हुआ था।
  • जामा मस्जिद, बादल महल, शाहजादी का रौज़ा – ऐसी कई ऐतिहासिक इमारतें आज भी अतीत का सजीव प्रमाण हैं।

यह जगह सच में एक ओपन-एयर म्यूज़ियम लगती है।

🎬 Stree 2 की शूटिंग — क्यों चंदेरी को चुना गया?

फिल्म Stree 2 की शूटिंग का बड़ा हिस्सा इन्हीं असली गलियों और हवेलियों में हुआ।
निर्माताओं ने सेट बनाने के बजाय चंदेरी की प्राकृतिक सुंदरता और पुराने माहौल को ही कैमरे में कैद किया।

  • संकरी गलियाँ
  • पीले पत्थरों की हवेलियाँ
  • पुराने किले की पृष्ठभूमि
  • रहस्यमयी रातें और विरान रास्ते

इन सबने फिल्म के हॉरर-कॉमेडी माहौल को अधिक वास्तविक बना दिया।
फिल्म में दिखाया गया “गाँव” वास्तव में चंदेरी शहर ही है।

🌙 चंदेरी की कहानी — पहाड़ियों में छिपा इतिहास, रहस्य और अनकही दास्तान

मध्य प्रदेश की शांत पहाड़ियों के बीच बसा चंदेरी ऐसा शहर है, जिसे देखकर लगता है मानो समय यहाँ ठहर गया हो। पत्थर की बनी गलियाँ, सदियों पुरानी हवेलियाँ और पहाड़ी पर बना किला — सब मिलकर इस जगह को एक ‘जीता-जागता इतिहास’ बना देते हैं। लेकिन चंदेरी सिर्फ इतिहास नहीं है… इसके भीतर एक अनकही रहस्यमयी कहानी भी दबी है।

🏰 बहुत पुराना शहर — जहाँ हर मोड़ पर एक दास्तान है

कहते हैं कि चंदेरी की नींव 11वीं सदी के राजा कीर्ति पाल ने रखी थी। तब यह मालवा के व्यापार का केंद्र था। दूर-दूर से लोग घोड़े, कपड़े, मसाले और कीमती धातुएँ खरीदने-बेचने आते थे।
धीरे-धीरे यह शहर:

  • दिल्ली सल्तनत
  • मुगल साम्राज्य
  • सिंधिया राजवंश

के अधीन रहा — इसलिए हर राज के निशान आज भी दीवारों में दिखते हैं।

🕌 काटी घाटी का रहस्य — एक ही रात में बना दरवाज़ा

चंदेरी में एक कहानी बहुत मशहूर है।

कहा जाता है कि 1480 ईस्वी में यहाँ के शासक ने पहाड़ी को काटकर रास्ता बनवाने का आदेश दिया। राजमिस्त्रियों ने महीनों काम किया मगर काम पूरा नहीं हो रहा था।

कहानी कहती है कि एक दिन रात में आंधी चली—और सुबह देखा गया कि:

👉 पूरा दरवाज़ा बन चुका था, वो भी एकदम सीधा, चिकना और बिना किसी निशान के।

लोगों ने इसे चमत्कार माना।
यह जगह आज काटी घाटी दरवाज़ा कहलाती है।

👻 रात का चंदेरी — जहाँ सन्नाटा भी कहानी सुनाता है

चंदेरी की गलियों और हवेलियों की अपनी-अपनी दास्तानें हैं।
स्थानीय लोगों की मानें तो कुछ जगहों पर आज भी रात के समय:

  • धीमी-धीमी आहटें
  • पुरानी हवेलियों में खटर-पटर
  • पहाड़ी रास्तों पर अचानक हवा का रुक जाना

इन्हीं कहानियों की वजह से चंदेरी को “रहस्यमयी शहर” कहा जाने लगा।
और यही वजह है कि Stree 2 जैसी फिल्में यहाँ शूट होती हैं—क्योंकि यहाँ का माहौल खुद एक कहानी है।

🧵 चंदेरी साड़ी की उत्पत्ति — एक रानी की अधूरी इच्छा

पुरानी लोककथा कहती है कि चंदेरी की एक रानी को बहुत महीन, हल्की और चमकदार साड़ी चाहिए थी—ऐसी कि हवा में उड़ते बादल जैसी लगे। राजा ने इस काम के लिए दूर-दूर से बुनकर बुलाए।

कहते हैं कि साड़ी इतनी महीन बनी कि:

👉 उसे मोड़ने पर एक कंगन में फिट हो जाती थी।

इससे चंदेरी की बुनाई पूरे हिंदुस्तान में मशहूर हो गई।

🌄 चंदेरी की असली पहचान — कहानियों का जाल

चंदेरी की कहानी किसी एक घटना की नहीं है।
यह कई युगों, कई राजाओं, कई युद्धों, कई कारीगरों और अनगिनत लोककथाओं का मिला-जुला संसार है।

यह शहर:

  • कभी व्यापार का केंद्र था
  • कभी युद्धभूमि बना
  • कभी कला का गढ़ बना
  • और आज पर्यटन का खजाना है

यहाँ हर पत्थर पर समय की खरोंच है, हर दीवार पर किसी चरवाहे, योद्धा, बुनकर या राजकुमारी की कहानी छिपी है।

आज भी चंदेरी में वही पुराना जादू है

अगर आप चंदेरी की गलियों से शाम के समय गुजरें—
पीले पत्थरों पर ढलती धूप को देखें—
किले की दीवारों पर चलती हवा की आवाज़ सुनें—

तो आपको भी लगेगा कि यह शहर आज भी अपनी कहानी सुना रहा है…
बस सुनने वाले कान चाहिए।

👉 ऐसी ही ताज़ा और खास खबरों के लिए हमें Facebook पर Follow करें

Follow Us on Facebook

Leave a Reply