एक दिन बादशाह अकबर ने दरबार में एक अनोखी प्रतियोगिता का ऐलान किया। उन्होंने कहा, “जो भी दरबारी सबसे बड़ा झूठ बोलेगा, उसे इनाम दिया जाएगा।”
यह सुनकर सभी दरबारी सोच में पड़ गए। झूठ बोलना आसान था, लेकिन “सबसे बड़ा झूठ” बोलना इतना भी सरल नहीं था। हर कोई ऐसा झूठ बोलना चाहता था जो बादशाह को प्रभावित कर दे।
अकबर मुस्कुराए, लेकिन बोले, “यह झूठ तो ठीक है, पर सबसे बड़ा नहीं।”
अकबर ने फिर सिर हिलाया और कहा, “यह भी साधारण झूठ है।”
अब बारी आई बीरबल की। पूरे दरबार की नजरें उन्हीं पर टिक गईं। सभी सोच रहे थे कि बीरबल अब क्या कहेंगे।
फिर अचानक अकबर जोर से हंस पड़े। उन्होंने कहा, “बीरबल, तुमने तो मुझे ही अपने झूठ में शामिल कर लिया! सच में, तुम सबसे बड़े चतुर हो।”
इस पर अकबर ने बीरबल को विजेता घोषित किया और उन्हें इनाम दिया। दरबार के सभी लोग बीरबल की बुद्धिमानी और हाजिरजवाबी की प्रशंसा करने लगे।
📚 सीख (Moral of the Story)
- बुद्धिमानी और हाजिरजवाबी से हर मुश्किल का हल निकाला जा सकता है।
- कभी-कभी चतुराई ही सबसे बड़ी ताकत होती है।
- सही समय पर कही गई समझदारी भरी बात सबसे प्रभावशाली साबित होती है।
ऐसी ही मजेदार कहानियां पढ़ने के लिए हमारे Facebook पेज को जरूर फॉलो करें।
👉 ऐसी ही ताज़ा और खास खबरों के लिए हमें Facebook पर Follow करें
Follow Us on Facebook










