इंदौर | मध्यप्रदेश डेस्क | अपडेट: 8 मार्च 2026
देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में होली के बाद मनाई जाने वाली ऐतिहासिक रंगपंचमी इस बार और भी भव्य होने जा रही है। 8 मार्च को शहर में पारंपरिक गेर और फाग यात्राओं के साथ रंगों का शानदार उत्सव देखने को मिलेगा।
इस बार आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यह रहेगी कि राजवाड़ा क्षेत्र में गेर के दौरान हेलीकॉप्टर से फूलों और गुलाल की वर्षा की जाएगी। इसके अलावा रंगों की तोप, मिसाइल और सांस्कृतिक झांकियों के जरिए इस उत्सव को और भी भव्य बनाने की तैयारी की गई है।
राजवाड़ा क्षेत्र में निकलेंगी चार गेर और दो फाग यात्राएं
इंदौर की रंगपंचमी की सबसे बड़ी पहचान यहां निकलने वाली पारंपरिक गेर है। इस बार राजवाड़ा क्षेत्र से चार प्रमुख गेर और दो फाग यात्राएं निकाली जाएंगी। इनमें हजारों लोग ढोल-नगाड़ों और रंग-गुलाल के साथ शामिल होंगे।
गेर में शामिल हुरियारे रंगों की बौछार करते हुए पूरे मार्ग से गुजरेंगे और शहर के कई प्रमुख स्थानों से होकर यह यात्रा आगे बढ़ेगी। हर साल की तरह इस बार भी यह आयोजन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उमड़ेंगे।
हेलीकॉप्टर से होगी फूलों और गुलाल की वर्षा
इस बार रंगपंचमी के आयोजन को और खास बनाने के लिए राजवाड़ा पर गेर के दौरान हेलीकॉप्टर से फूलों और गुलाल की वर्षा की जाएगी। आयोजकों के अनुसार यह स्वागत इंदौर के इतिहास में पहली बार इतने बड़े स्तर पर किया जाएगा।
जब हजारों हुरियारे रंगों में सराबोर होकर राजवाड़ा पहुंचेंगे, उस समय ऊपर से होने वाली पुष्प वर्षा इस आयोजन के उत्साह को कई गुना बढ़ा देगी।
आसमान में बनेगा तिरंगा रंग
आयोजन के दौरान रंगों की विशेष तोप और मिसाइल का इस्तेमाल किया जाएगा। इनके जरिए रंगों की बौछार आसमान में छोड़ी जाएगी, जिससे आसमान में तिरंगे जैसा दृश्य दिखाई देगा।
बताया जा रहा है कि इसके लिए टेसू के फूलों से तैयार प्राकृतिक रंग का इस्तेमाल किया जाएगा, जो पर्यावरण के लिए सुरक्षित माना जाता है।
बरसाना की लट्ठमार होली और राधा-कृष्ण महारास
रंगपंचमी के इस आयोजन में इस बार ब्रज संस्कृति की झलक भी देखने को मिलेगी। राजवाड़ा क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में बरसाना की प्रसिद्ध लट्ठमार होली का मंचन किया जाएगा।
इसके अलावा राधा-कृष्ण महारास की झांकी भी प्रस्तुत की जाएगी, जो श्रद्धालुओं और दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र होगी।
प्राकृतिक रंगों से खेली जाएगी रंगपंचमी
आयोजकों के अनुसार इस बार रंगपंचमी में पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा गया है। इसके लिए टेसू और पलाश के फूलों से प्राकृतिक रंग तैयार किया गया है।
बताया गया है कि करीब 8 हजार किलो टेसू के फूलों से लगभग 2500 किलो रंग-गुलाल तैयार किया गया है, जिसे गेर के दौरान उड़ाया जाएगा।
शहर के कई इलाकों से निकलेंगी रंग यात्राएं
राजवाड़ा के अलावा इंदौर शहर के कई अन्य इलाकों से भी फाग यात्राएं और रंगारंग झांकियां निकाली जाएंगी। इनमें भजन मंडलियां, गरबा मंडलियां, आदिवासी नृत्य दल और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल होंगे।
इन यात्राओं के दौरान सामाजिक समरसता, संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को दर्शाने वाली झांकियां भी प्रस्तुत की जाएंगी।
इंदौर की रंगपंचमी क्यों है खास
इंदौर की रंगपंचमी सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि शहर की पहचान बन चुकी है। यहां की गेर देशभर में प्रसिद्ध है और हर साल हजारों लोग इसे देखने के लिए इंदौर पहुंचते हैं।
ढोल-नगाड़ों की गूंज, रंगों की बारिश और उत्साह से भरा माहौल इंदौर की रंगपंचमी को देश के सबसे खास त्योहारों में शामिल करता है।
इस बार भी शहर में रंगपंचमी को लेकर जबरदस्त उत्साह है और उम्मीद की जा रही है कि यह आयोजन पहले से भी ज्यादा भव्य और यादगार होगा।
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