नई दिल्ली | स्पोर्ट्स डेस्क | अपडेट: 2 मार्च 2026
वेस्टइंडीज के खिलाफ ईडन गार्डन्स में संजू सैमसन की 97* रनों की धमाकेदार पारी के बाद सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट गलियारों तक एक ही सवाल गूंजता रहा — टी20 वर्ल्ड कप के शुरुआती मैचों में संजू सैमसन प्लेइंग इलेवन से बाहर क्यों थे?
अब इस पर टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर ने खुलकर जवाब दिया है। उन्होंने साफ किया कि यह फैसला किसी खिलाड़ी को “ड्रॉप” करने के लिए नहीं, बल्कि सोची-समझी रणनीति के तहत लिया गया था।
“यह ड्रॉप नहीं था, रणनीति थी” — गौतम गंभीर का बयान
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में गौतम गंभीर ने कहा कि संजू सैमसन की प्रतिभा पर टीम को कभी संदेह नहीं था। उनके मुताबिक, न्यूजीलैंड के खिलाफ कठिन दौर के बाद संजू को मानसिक रूप से तरोताजा करने के लिए एक ब्रेक देना जरूरी था।
“संजू एक वर्ल्ड क्लास खिलाड़ी हैं। न्यूजीलैंड सीरीज उनके लिए मुश्किल रही थी। एक कोच के तौर पर मुझे लगा कि उन्हें ब्रेक की जरूरत है ताकि वो तरोताजा होकर लौटें। लेकिन हमारे मन में स्पष्ट था— जब बड़े मैच में टीम को जरूरत होगी, संजू उतरेंगे और मैच जिताएंगे।”
गंभीर के बयान के बाद यह चर्चा और तेज हो गई कि टीम मैनेजमेंट ने संजू को सही समय पर “ट्रंप कार्ड” की तरह इस्तेमाल किया।
ईडन गार्डन्स में ‘महा-कमबैक’: 51 गेंदों में 97* रन
सुपर-8 के इस मुकाबले में भारत को 195 रन का लक्ष्य मिला था। शुरुआती झटकों के बाद संजू सैमसन ने पारी को संभाला और वेस्टइंडीज के गेंदबाजों पर जोरदार हमला बोला।
- रन: 97* (नाबाद)
- गेंदें: 51
- चौके: 12
- छक्के: 4
संजू ने ओपनर की तरह शुरुआत की, लेकिन अंत में फिनिशर की भूमिका निभाते हुए भारत को जीत की दहलीज पार करा दी। भारत ने 4 गेंद शेष रहते मुकाबला अपने नाम किया।
11 साल के करियर में सिर्फ 66 मैच: फिर भी ‘स्पेशल’ क्यों?
संजू सैमसन ने इंटरनेशनल डेब्यू 2015 में किया था, लेकिन 11 साल बाद भी उनके खाते में सीमित मैच ही हैं। कई बार उन्हें लगातार मौके नहीं मिल पाए, कभी बैटिंग ऑर्डर बदला गया, तो कभी एक-दो असफलताओं के बाद बाहर बैठना पड़ा।
हालांकि, ईडन की इस पारी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े खिलाड़ी बड़े मंच पर ही सबसे बड़ा फर्क पैदा करते हैं। यही वजह है कि गंभीर ने उन्हें “वर्ल्ड क्लास” कहा।
अब सेमीफाइनल में इंग्लैंड से टक्कर
वेस्टइंडीज पर जीत के साथ भारत ने सेमीफाइनल में जगह बना ली है। अब 5 मार्च को भारत का सामना इंग्लैंड से होगा। फैंस की उम्मीदें एक बार फिर संजू सैमसन पर होंगी कि वे उसी फॉर्म को आगे भी जारी रखें।
क्रिकेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि गंभीर की रणनीति और संजू का आत्मविश्वास, भारत को फाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
निष्कर्ष
संजू सैमसन को शुरुआती मैचों में बाहर रखना अब “विवाद” नहीं, बल्कि एक स्ट्रैटेजिक मास्टर-प्लान के रूप में देखा जा रहा है। गंभीर का भरोसा और संजू का ‘महा-कमबैक’ — यही टीम इंडिया की सबसे बड़ी ताकत बनता दिख रहा है।
अब नजरें सेमीफाइनल पर हैं… क्या संजू फिर से मैच-विनर बनेंगे?
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